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Thursday, 31 December 2020

अमिताभ बच्चन

 


अक्टूबर 11, 1942 को उतरप्रदेश के जिले इलाहबाद के हिन्दू 

परिवार में अमिताभ बच्चन का जन्म हुआ | आरंभ में बच्चन का नाम इंकलाब रखा गया था जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान प्रयोग में किए गए प्रेरित शब्द ‘इंकलाब जिंदाबाद’ से लिया गया था। लेकिन बाद में इनका फिर से अमिताभ नाम रख दिया गया जिसका अर्थ है, "ऐसा प्रकाश जो कभी नहीं बुझेगा"। उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद, में जन्मे अमिताभ बच्चन के पिता, डॉ॰ हरिवंश राय बच्चन एक प्रसिद्ध हिन्दी कवि थे, जबकि उनकी माता तेजी बच्चन कराची से संबंध रखती थीं। एक दिलचस्प बात और भी है इनका अंतिम नाम श्रीवास्तव है फिर भी इनके पिता ने इस उपनाम को अपने कृतियों को प्रकाशित करने वाले बच्चन नाम से प्रकशित किया। अब यह उनके परिवार के समस्त सदस्यों के साथ यह नाम जुड़ गया।


 


शिक्षा


अमिताभ बच्चन बॉलीवुड के उन अभिनेताओं में भी है जिन्होंने अच्छी खासी पढाई करी है उन्होंने दो बार एम. ए. की उपाधि ग्रहण की है। इन्होंने इलाहाबाद के ज्ञान प्रबोधिनी से मास्टर ऑफ आर्ट्स (स्नातकोत्तर) तथा उसके शेरवूड कॉलेज जो नैनीताल में है से आर्ट में अपनी ग्रेजुएशन की हुई है| अमिताभ बाद में विज्ञानं में स्नातक स्तर की पढ़ाई करने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज चले गए| इसके बाद इलाहाबाद से MA ज्ञान प्रबोधिनी कॉलेज से की।


 


करियर और फिल्म इंडस्ट्री


शुरू में इन्हें फिल्मो की दुनिया में आने के लिए किसी भी तरह की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ा | फ़िल्मों में अपने कैरियर की शुरूआत ख्वाज़ा अहमद अब्बास के निर्देशन में बनी फिल्म सात हिन्दुस्तानी के सात कलाकारों में एक कलाकार के रूप में की| अपनी पहली फ़िल्म के लिए राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ नवागंतुक का पुरूस्कार जीता।


फिल्मी दुनिया मे आने से पहले अमिताभ एक शिपिंग कम्पनी में नौकरी करते थे उसके बाद माता जी का सहयोग मिलने पे वो फिल्मी दुनिया मे आए | अमिताभ ने अपने टैलेंट और अभिनय के दम पर इंडस्ट्री में बादशाह का मुकाम हासिल किया है|


मशहूर लेखक-निर्देशक ख्वाजा अहमद अब्बास ने उन्हें अपनी फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ (1969) में ब्रेक दिया। इसके बाद उन्हें ‘आनंद’ (1970) और ‘नमक हरम’ (1973) में उस दौर के सुपर स्टार राजेश खन्ना के साथ उत्कृष्ट अभिनय करने के लिए पहचाने गए, लेकिन ‘जंजीर’ (1973)फिल्म से उन्हें ‘एंग्री यंग मैन’ की ऐतिहासिक इमेज मिली। ‘शक्ति’ (1982) में दिलीप कुमार एवं ‘आनंद’ में राजेश खन्ना के साथ अपनी श्रेष्ठता सिध्द कर उन्होंने हिंदी सिनेमा पर अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया।


 


स्टार बनने का सफर


1973 में आई प्रकाश मेहरा की एक फिल्म अमिताभ बच्चन की जिन्दगी में स्टार बनने के लिए महत्वपूर्ण मोड़ लाया जब इसमे इन्हें एक इंस्पेक्टर का रोल मिला जिसमे “ इंस्पेक्टर खन्ना “इनके किरदार का नाम था और उस किरदार में अमिताभ एकदम अलग तरह के रोल में थे और साथ ही इनकी भारी आवाज जिसके लिए इन्हें आल इंडिया रेडियो मे RJ के पद के लिए निकाल दिया गया था वही इनकी खासियत भी बनी ऐसे में जनता के लिए अमिताभ का यह रूप बहुत पसंद आने वाला था और इसके बाद “ अंगरी यंगमैन “और बॉलीवुड के एक्शन हीरो की रूप में एक नई छवि अमिताभ की जनता के बीच में बनी जिसने इन्हें बेहद लोकप्रिय बना दिया |3 जून 1973 अमिताभ ने जय भादुड़ी से बंगाली संस्कार मे शादी किया |


 


लाइफ चेंजिंग इवेंट्स


कई सारी कामयाब फिल्मो की वजह से 1976 से लेकर 1984 तक बहुत सारे पुरस्कार भी मिले मिले जिसमे से एक उनकी बेहद कामयाब शोले और दीवार जैसी फिल्म भी है,शोले आज भी बॉलीवुड की एक सबसे कामयाब फिल्मों मे जाना जाता है और जाना जाता रहेगा| सबसे अधिक फिल्मफेयर अवार्ड्स पाने वाले अभिनेताओ और फिल्म इंडस्ट्री के सबसे कामयाब और पहचान वाले अभिनेता मे से एक नाम अमिताभ बच्चन का भी आता है | तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और बारह सर्वश्रेष्ठ फिल्म अभिनेता के फिल्मफेयर पुरस्कार अमिताभ के नाम है जो की एक बहुत ही बारी बात है |


 


1984 में इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद अपने दोस्त राजीव गाँधी की सलाह पर वो राजनीती में उतरे और इलाहाबाद के राजनीती के चाणक्य कहे जाने वाले हेमवती नंदन बहुगुणा को हरा कर 1984-1987 तक संसद के निर्वाचित सदस्य के रूप में भी इन्होने अपनी भूमिका दी है | मगर कुछ ही समय बाद इन्होंने राजनीति छोर दिया |


 


बच्चन अपनी जबरदस्त आवाज़ के लिए जाने जाते हैं। वे बहुत से कार्यक्रमों में एक वक्ता, पार्श्वगायक और प्रस्तोता रह चुके हैं साथ ही एक अच्छे विज्ञापन करता के रूप में भी अमिताभ की पहचान बनी हुई है| उम्र के इस दौर में वो 73 साल के हुए चुके थे तब ‘कौन बनेगा करोडपति ‘ शो में इन्होने होस्ट के तौर पर काम किया| अमिताभ ने 12 से अधिक फिल्मो में डबल रोल और एक फिल्म “ महान “ मे तो उन्होंने triple role भी किया है। उनके इस खास मुकाम के कारण फ़्रांस के एक शहर द्युविले की मानद नागरिकता भी है | जो की इस दुनिया मे उस देश के अलावा सिर्फ तीन को ही यह नागरिकता मिली है |


 


लव लाइफ और अफेयर्स


1978 में अमिताभ और रेखा की बीच बढती नजदीकियों को लेकर देशभर के अख़बारों में भी यह सुर्खियाँ बनती जा रही थी बल्कि दोनों के घर में बहुत हंगामा हुआ, इस बारे में सुना गया था कि रेखा दिल ही दिल में अमिताभ बच्चन को बहुत पसंद करती थी मगर कभी किसी ने भी कुछ जाहीर नहीं किया | जिसके कारण बाद मे अमिताभ की शादी जया जी से हुई|


 


बच्चों और परिवार


अभिषेक बच्चन और श्वेता नंदा बच्चन अमिताभ बच्चन की दो संताने है, जिसमें से अभिषेक बच्चन खुद भी अभिनेता है और अभिषेक का विवाह ऐश्वर्या राय के साथ हुआ है जो बेहद खूबसूरत अभिनेत्री रह चुकी है और वो विश्व सुंदरी भी रह चुकी है | करोड़ो दिलो को धड़कन रह चुकी ऐश्वर्या को अपने हमसफ़र के रूप में पाने वाले अभिषेक बच्चन बेइंतिहा लकी है , मगर उनका लक एक्टिंग की दुनिया मे कुछ ठीक नहीं है | 


 


सामाजिक रूप से सक्रिय


अपने फेंस के साथ जुड़े रहने के लिए सोशल साइट्स जैसे ब्लॉग और फेसबुक और ट्विटर पर भी काफी सक्रिय रहते है। शिवसेना प्रमुख रह चुके स्वर्गीय बाल ठाकरे अमिताभ बच्चन के बारे में यंहा तक कह चुके है कि जंहा लोग भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बारे में नहीं जानते लेकिन वो अमिताभ बच्चन को जानते है ऐसे में उन्हें भारत रत्न दिया जाना सही है | 

Tuesday, 29 December 2020

बोले हुए शब्द वापस नहीं आते






हमारे दिन प्रतिदिन के जीवन में कई बार ऐसा होता है कि हम या तो बहुत गुस्से में झुंझलाकर या बस यूँ ही कुछ ऐसा कह जाते हैं जो हमें नहीं कहना चाहिए| आज मैं आपके साथ एक छोटी सी कहानी Share कर रहा हूँ जो मैंने You Can Win by Shiv Khera में पढ़ा था| इसे ध्यान से पढ़िए और इससे मिलने वाली सीख को गाँठ बाँध लीजिये|

एक बार एक किसान ने अपने पडोसी को भला बुरा कह दिया, पर जब बाद में उसे अपनी गलती का एहसास हुआ तो वह एक संत के पास गया| उसने संत से अपने शब्द वापस लेने का उपाय पूछा| संत ने किसान से कहा , ”तुम खूब सारे पंख इकठ्ठा कर लो और उन्हें शहर के बीचो-बीच जाकर रख दो |” किसान ने ऐसा ही किया और फिर संत के पास पहुंच गया| तब संत ने कहा , ”अब जाओ और उन पंखों को इकठ्ठा कर के वापस ले आओ|”

किसान वापस गया पर तब तक सारे पंख हवा से इधर-उधर उड़ चुके थे, और किसान खाली हाथ संत के पास पहुंचा| तब संत ने उससे कहा कि ठीक ऐसा ही तुम्हारे द्वारा कहे गए शब्दों के साथ होता है| तुम आसानी से इन्हें अपने मुख से निकाल तो सकते हो पर चाह कर भी वापस नहीं ले सकते|

इस कहानी से क्या सीख मिलती है :-

  • कुछ कड़वा बोलने से पहले ये याद रखें कि भला-बुरा कहने के बाद कुछ भी कर के अपने शब्द वापस नहीं लिए जा सकते| हाँ, आप उस व्यक्ति से जाकर क्षमा ज़रूर मांग सकते हैं, और मांगनी भी चाहिए, पर Human Nature कुछ ऐसा होता है की कुछ भी कर लीजिये इंसान कहीं ना कहीं Hurt हो ही जाता है|

  • जब आप किसी को बुरा कहते हैं तो वह उसे कष्ट पहुंचाने के लिए होता है पर बाद में वो आप ही को अधिक कष्ट देता है| खुद को कष्ट देने से क्या लाभ| इससे अच्छा तो है की चुप रहा जाए|